20 गेंद में 67 रन बनाने वाला बल्‍लेबाज Raja Babu अब गाजियाबाद की सड़कों पर चला रहा ई-रिक्‍शा

20 गेंद में 67 रन बनाने वाला बल्‍लेबाज Raja Babu अब गाजियाबाद की सड़कों पर चला रहा ई-रिक्‍शा

20 गेंद में 67 रन बनाने वाला धुरन्दर बल्‍लेबाज अब गाजियाबाद की सड़कों पर चला रहा ई-रिक्‍शा

आज से लगभग पांच साल पहले राजा बाबू ने डिसेबल्‍ड (Disabled) क्रिकेट सर्किट में अपनी धमाकेदार बल्‍लेबाजी से तहलका मचा दिया था। फिर उसके बाद कोरोना महामारी आई और Raja Babu का करियर चौपट हो गया जिसने उनकी जिंदगी को बदलकर रख दिया।

 

                              -: Highlights:-

क्रिकेटर Raja Babu गाजियाबाद में रिक्‍शा चलाकर गुजारा कर रहे 

2017 में अपनी धाकड़ बैटिंग से सबको चौंका दिया था 

कारण, कोरोना के चलते दिव्‍यांग क्रिकेट एसोसिएशन भंग हुई

उसके बाद से बिगड़ती चली गई क्रिकेटर की आर्थिक हालत

 

क्रिकेटर की ऐसी हालत क्यों हुई ?

बात है 2017 की गर्मियो में मेरठ में ‘हौसलों की उड़ान’ नाम का नैशनल लेवल क्रिकेट मैच चल रहा था। दिल्‍ली के खिलाफ उत्‍तर प्रदेश की और से खेलते हुए राजा बाबू ने 20 गेंद में 67 रन कूट दिए। इस बेहतरीन पारी के लिए Raja Babu को न सिर्फ तारीफें मिलीं, बल्कि इनाम भी दिया गया था। इसी ताबड़तोड़ बैटिंग से प्रभावित होकर एक लोकल कारोबारी ने Raja Babu को एक ई-रिक्‍शा दिया। शायद Raja Babu ने तब सोचा भी नहीं था कि यह इनाम एक दिन उनके इतना काम आएगा कि बाएं हत्‍था विस्‍फोटक क्रिकेटर की पहचान बनकर सामने आएगा। दिव्‍यांग क्रिकेट सर्किट एसोसियन में स्‍टेट और नैशनल लेवल के टूर्नमेंट्स में Raja Babu का जलवा हो गया। Raja Babu को सन 2017 में IPL की दर्ज पर एक T20 टूर्नमेंट में मुंबई की टीम का कप्‍तान भी चुन लिया गया था। हालांकि पिछले दो साल से भी ज्‍यादा वक्‍त से Raja Babu गाजियाबाद की सड़कों पर वही ई-रिक्‍शा चला रहे हैं जो उसको इनाम में मिली थी।

Raja Babu बताते हैं कि कोरोना वायरस महामारी के बाद उनके करियर और जिंदगी तबाह हो गयी। अब मुझे चार लोगों के परिवार जिनमें पत्‍नी निधि और बच्‍चे- कृष्‍णा  और शानवी शामिल हूँ , इनका भरण-पोषण के लिए रोज मुझे सड़कों की खाक छाननी पड़ती है।

 

गुजारे के लिए दूध बेचा

क्रिकेट खेलने के दौरान भी Raja Babu को इधर-उधर का काम करना पड़ता था। कभी-कभी तो इनकम बढ़ाने के लिए ई-रिक्‍शा भी चलाया। लेकिन असली परेशानी 2020 में आई जब यूपी में दिव्‍यांग क्रिकेटर्स के लिए बनी चैरिटेबल संस्‍था, दिव्‍यांग क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) भंग हो गई थी। राजा के लिए पैसों की आमद रुक ही गई। Raja Babu कहते हैं, कि ‘उससे सच में हमारी कमर टूट गई। कोरोना के शुरुआती कुछ महीने मैंने गाजियाबाद की सड़कों पर दूध बेचा और जब भी मौका मिला तो ई-रिक्‍शा चलाया। क्रिकेट टीम के मेरे बाकी साथी उस दौरान मेरठ में ‘डिसेबल्‍ड ढाबा’ पर डिलिवरी एजेंट्स और वेटर्स का काम कर रहे थे। ये ढाबा भी एसोसिएशन के संस्‍थापक और कोच अमित शर्मा ने ही खोला था।’

 

कैसे बना दिव्यांग?

ट्रोफियों और मेडल्‍स से भरे कमरे में बैठकर Raja Babu अपनी आवाज से निराशा जाहिर नहीं होने देते। उनकी बातों से पिच पर खेलने की वापसी की उम्‍मीद झलकती है। वह कहते हैं, ‘1997 में में जब स्‍कूल से घर लौट रहा था तब एक ट्रेन हादसे में मैंने बायां पैर खो दिया। उस वक्‍त मेरे पिता रेलवे में ग्रेड IV कर्मचारी थे और वे कानपुर के पनकी में तैनात थे। हादसे के बाद मेरी पढ़ाई रुक ही गई थी क्‍योंकि परिवार स्‍कूल की फीस नहीं चुका सकता था। हादसे ने मेरी पूरी जिंदगी बदली मगर मैंने सपने देखना नहीं छोड़ा।’ और महामारी में एक के बाद एक झटकों के बावजूद Raja Babu का जोश बरकरार है।

Raja Babu और क्रिकेट का रिश्‍ता पुरे 12 साल की उम्र से शुरू हुआ जब उन्‍होंने गली क्रिकेट में अपना हाथ आजमाया। 2000 में Raja Babu ने कानपुर में आरामीना ग्राउंड पर ट्रेनिंग शुरू की। 23 साल की उम्र में Raja Babu जिला स्‍तर के टूर्नमेंट्स खेल रहे थे। Raja Babu ने बताया, ‘2013 में भी मैंने बिजनौर में कुछ टूर्नमेंट्स खेले है। उसी दौरान शर्मा जी जो तब DCA के निदेशक भी थे, उन्होंने मुझे एसोसिएशन से जुड़ने को कहा। 2015 के उत्‍तराखंड के दिव्‍यांग क्रिकेट टूर्नमेंट में मुझे बेस्‍ट प्‍लेयर के लिए अवार्ड मिला। फिर अगले साल मैं यूपी टीम का कैप्‍टन बन गया।’ Raja Babu के अनुसार, वह उनके करियर के कुछ सबसे अच्‍छे साल भी रहा।

 

नौकरी छोड़ने की खास वजह 

Raja Babu अपनी शादी के बाद 2014 में बाबू नौकरी की तलाश में गाजियाबाद आ गए। उन्‍होंने कहा, ‘मैंने जूता बनाने वाली एक फैक्‍ट्री में 200 रुपये दिहाड़ी पर भी काम किया है। पैसा कमाना भी जरूरी था लेकिन क्रिकेट और फैक्‍ट्री के काम में तालमेल बिठा पाना बड़ा मुश्किल हो रहा था इसलिए 6 महीनों बाद नौकरी छोड़कर सिर्फ क्रिकेट पर ही फोकस करने की सोचने लगा।’ बाबू ऐसे खिलाड़ी थे जिनको हर टीम अपने साथ रखना चाहती थी। देखा जाये तो टूर्नमेंट के हिसाब से वह कभी क्रचेज के साथ खेलते, कभी वीलचेयर पर भी खेलते थे। जब किस्‍मत चमकी तो यूपी और गुजरात में उन्‍होंने कुछ अवार्ड्स जीते। 2016 में वह नैशनल लेवल के टूर्नमेंट में मैन ऑफ द मैच रह चुके है। व्ही बाद में उसी साल बिहार सरकार ने Raja Babu को  खेल के क्षेत्र में योगदान के लिए सम्‍मानित भी किया।

UPCA (दिव्‍यांग) के चेयरपर्सन अतुल श्रीवास्‍तव बताते हैं कि बांग्‍लादेश जैसे देशों में दिव्‍यांग क्रिकेटर्स का सारा खर्च क्रिकेट एसोसिएशन ही उठाती है। इन सभी दिव्‍यांग क्रिकेटर्स के रिटायरमेंट के बाद पेंशन भी मिलती है। उन्‍होंने कहा कि ‘BCCI को भी इस दिशा में कदम उठाने चाहिए ताकि दिव्‍यांग क्रिकेटर्स को पैसे और नौकरी की चिंता किए बिना खेल सकें।’ और इसी साल अप्रैल में, BCCI की शीर्ष काउंसिल ने दिव्‍यांगों को, और मूक-बधिरों और वीलचेयर पार्टिसिपेंट्स के बीच क्रिकेट को प्रमोट करने के लिए डिफरेंटली एबल्‍ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (DCCI) को मान्‍यता भी दे दी है।

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